वृद्धावस्था
एपिसोड ११: आखिरी पड़ाव, नयी उम्मीदें
हमें इस दुनिया में लाने वाले हमारे माता पिता हैं और आज हम जो भी हैं उन्हीं की देन है. हमारे लिए इतना कुछ करने के प्रतिफल के रूप में हमें उनके प्रति नम्र तथा उदार होना ही चाहिए. लेकिन भारत में बहुत सारे लोग इस तरह के विचार नहीं रखते हैं, इसी कारण अनगिनत परित्यक्त बुजुर्ग वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं. वहीँ कुछ ऐसे उम्रदराज लोग भी हैं, जो अपने जीवन की बागडोर अपने हाथों में रखे हुए हैं. चाहे रोमांस हो या साहसिक खेल.