शराब का उपभोग मजे तथा जीवन का आनंद लेने के साथ जुड़ा हुआ है. लेकिन अत्यधिक मात्रा में गैरजिम्मेवार तरीके से इसका सेवन जीवन को ही दूर कर देता है. कईयों ने शराब की लत से पीछा छुड़ा कर सामान्य जीवन में वापस प्रवेश किया है और यह सिद्ध किया है कि बिना शराब के भी जीवन आनंददायक है. शराब की लत में डूबे हुए लोगों के लिए ‘एल्कोहलिक एनोनिमस’ की तरफ से नि:शुल्क सहायता उपलब्ध है. कभी कभार पीने वालों को भी मदहोश होने के लिए नहीं पीना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में नशे में गाड़ी नहीं चलानी चाहिए. क्योंकि वास्तव में यह त्रासदी का मार्ग है.
शराब पर निर्भरता या मदिरा व्यसन एक प्राथमिक तथा दीर्घकालिक बीमारी है जो बढ़ती जाती है और अक्सर घातक है. शराब पर निर्भरता कैंसर या हृदयरोगों की तरह अपने आप में एक बीमारी है जो मदिरा रोगियों में पहचाने जा सकने वाले लक्षणों के समूह के रूप में दिखाई पड़ती है.
शराब का उपभोग मजे तथा जीवन का आनंद लेने के साथ जुड़ा हुआ है. लेकिन अत्यधिक मात्रा में गैरजिम्मेवार तरीके से इसका सेवन जीवन को ही दूर कर देता है. कईयों ने शराब की लत से पीछा छुड़ा कर सामान्य जीवन में वापस प्रवेश किया है और यह सिद्ध किया है कि बिना शराब के भी जीवन आनंददायक है.
विजय सिम्हा भारतीय मीडिया के 16 सालों से एक जाने माने नाम हैं और वर्तमान में एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्य करने के साथ साथ शराब तथा नशे की लत से पुनर्वापसी के लिए अभियान तथा परामर्श कार्यक्रम चलाते हैं.
एल्कोहलिक एनॉनिमस (एए ) पुरुषों और महिलाओं का एक संघ है जो आपस में अपने अनुभव, भरोसे तथा ताकत को साझा करते हैं ताकि अपनी समस्या को हल सकें और मदिरा रोग से उबरने में एक दूसरे की मदद कर सकें.
आग हमें गर्मी देती है, लेकिन जलाती भी है. हम इसे अपने फायदों के लिए प्रयोग करते हैं पर इसके ज्यादा समीप नहीं जाते हैं. हमारी जीवित रहने की इच्छा और आत्मसंरक्षण की भावना हमें इससे दूर रहने पर मजबूर कर देती है. लेकिन शराब के साथ ऐसा नहीं होता है.