स्वयंसेवी संगठन और डोनेशन...
1981 में स्थापित अमर ज्योति नि:शक्त व्यक्तियों को समावेशी और एकीकृत शिक्षा, चिकित्सीय देखभाल, व्यावसायिक शिक्षा, बाल मार्गदर्शन तथा स्वरोजगार के माध्यम से पुनर्वास सुविधाएँ प्रदान करने के प्रति पूर्णत: समर्पित स्वयंसेवी संस्था है.
एकीकरण और समावेशन की अवधारणा में अग्रणी अमर ज्योति, नयी दिल्ली में एक विद्यालय संचालित करता है जहाँ 602 नि:शक्त और सामान्य बच्चे बराबर संख्या में साथ साथ अध्ययन करते हैं. विद्यालय के पाठ्यक्रम में व्यवसायिक प्रशिक्षण के खेल तथा अन्य पाठ्येतर गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनके द्वारा आत्मविश्वास तथा बहुआयामी व्यक्तित्व को विकसित किया जाता है.
नवाचार तथा मानव संसाधन विकास में मार्गदर्शक के रूप में अमर ज्योति ने कई राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये हैं .
सुविधाविहीन वर्ग तक पहुँचने के लिए अमर ज्योति दिल्ली के 30 मलिन बस्तियों में समुदाय आधारित पुनर्वास परियोजनायों को संचालित करता है, जहाँ जरुरत के हिसाब से नि:शक्त व्यक्तियों को पुनर्वास सेवाएं प्रदान की जाती हैं.
सामर्थ्य निर्माण के लिए अमर ज्योति भौतिक चिकित्सा में डिग्री पाठ्यक्रम, विशेष शिक्षा में डिप्लोमा, लघु अवधि के तथा कार्यरत शिक्षकों के लिए दूरस्थ पाठ्यक्रम संचालित करता है. यह संस्था राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय तथा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से भी मान्यता प्राप्त है.
अमर ज्योति के बाल मार्गदर्शन केंद्र में अनुभवी पेशेवरों द्वारा मानसिक नि:शक्त बच्चों के लिए घर पर प्रशिक्षण एवं सहायता की सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं.
अमर ज्योति पुनर्वास इंटरनेशनल का सहयोगी सदस्य है तथा इसे नि:शक्त व्यक्तियों के प्रति अपनी उत्कृष्ट सेवायों के लिए भारत के राष्ट्रपति से राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त है.
सायकिल रिक्शा से हाइड्रोलिक लिफ्ट युक्त बाधा मुक्त बस तक, पेड़ के नीचे से नियमित विद्यालय तक, दरी पर बैठने से विशेष जरूरतों के हिसाब से तैयार किये गए फर्नीचर तक, घास पर खेलने से लेकर बढ़िया खेल के मैदान तक, एक बरसाती से दिल्ली और ग्वालियर में दो बाधामुक्त भवनों के साथ संस्थान के मुख्य केंद्र तक, कागज की बांसुरी से आर्केस्ट्रा और बैंड तक, हस्तलिखित सालाना प्रतिवेदनों से मुद्रित प्रकाशनों तक, सुई से लेकर बुनाई की मशीन तक, हाथ-पैर से चलने वाली सिलाई मशीनों से विद्युत् चालित सिलाई मशीनों तक , राष्ट्रीय एकीकृत खेल के आयोजन से लेकर 6 वीं अंतर्राष्ट्रीय नि:शक्त ओलम्पिक के आयोजन तक की यह एक असाधारण यात्रा है.
अमर ज्योति के संस्थापक डॉ० उमा तुली के लिए ये सभी कदम उस भारत के लक्ष्य के लिए हैं, जहाँ सभी नि:शक्त और सामान्य नागरिकों को एक ही मंच पर स्थान दिया जाता हो.