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बाल यौन शोषण

एपिसोड २: चुप्पी तोड़ो


बच्चों का यौन शोषण एक डरावना सच है और अधिकांश इसके विस्तार से अनजान हैं. शोध बताते हैं कि 53 प्रतिशत तक बच्चे या प्रत्येक दो में से एक, बाल यौन शोषण के शिकार हैं .सामान्य धारणा के विपरित, घर बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह नहीं हैं, क्योंकि अधिकांश दुर्व्यवहारी परिवार के विश्वासी होते हैं. दुर्व्यवहार को मना कर सकने के साहस के लिए बच्चों को प्रशिक्षित तथा प्रोत्साहित करने के साथ साथ अभिभावकों को भी उनके संकेतों के प्रति संवेदनशील होने की जरुरत है. इसके अतिरिक्त बच्चों की सुरक्षा तथा अपराधियों को सख्ती के साथ दण्डित करने के लिए बाल यौन शोषण के खिलाफ विशेष एवं ठोस कानून की आवश्यकता है.



मॊस्त रॆद्
आतंक के साये में बच्चे पढ़ें
चुप्पी तोड़ो पढ़ें
अतिथि परिचय पढ़ें
देख कर जानें पढ़ें
आओ बात करें. पढ़ें
 
 
अतिथि परिचय
 
  
 
 
सिन्ड्रेला प्रकाश एक पेशेवर संगीतकार हैं, गिटार बजाती हैं, अपने खुद के लिखे हुए गाने गाती हैं. उनका एलबम "महफूज " अभी हाल में ही जारी हुआ है. मानसिक अवसादों से गुजरने के बावजूद अपनी मुस्कान और खुशियाँ बाँट कर अपने चारों और उजाला फैलाती हैं.
हरीश अय्यर को जानने वाले कहते हैं कि हरीश अय्यर ने जीवन में आने वाली कठिनाइयों को स्वीकार करना तथा उन्हें अपने अनुकूल बनाना सीख लिया है. वे बाल अधिकारों के मुखर प्रचारक रहे हैं तथा इन्होने कई स्वयंसेवी संस्थायों के साथ काम किया है. वे इस बात में विश्वास रखते हैं कि पश्चाताप करने वाले को माफ़ कर देना चाहिए. हरीश कहते हैं -" घृणा, घृणा करने वाले को नष्ट कर देती है."

नाज़नीन टोंस कवि और लेखक हैं. वे कहती हैं कि जो उन्होंने सहा है वो कई भावनायों का सम्मिश्रण है, उसमे घबराहट और आतंक है, चिंता और दर्द है, शर्मिंदगी और अपमान है . इस सम्मिश्रण को उन्हें बचपन से ही झेलना पड़ा है. तब भी वो इसे फिर झेलने की इच्छा रखती हैं, क्योंकि चुप रहने से ज्यादा महत्वपूर्ण चुप्पी तोड़ना है. नाज़नीन लिखती हैं -" उन सभी अन्य व्यक्तियों को जिनका बचपन मेरे जैसा था, उन्हें यह जानने की जरुरत है कि इन सब के बावजूद आप-बीती सुनाने के लिए हम बच गए. हम इसका सामना कर सकते हैं और इससे सीख ले सकते हैं. इसको छोड़ के आगे बढ़ सकते हैं. और वो सभी अन्य बच्चे जिनका बचपन इन सबसे अछूता रहा, उन्हें हमारे अनुभवों को जानने की जरुरत नहीं है.

गणेश नल्लारी ने अपना कैरियर एक दन्त चिकित्सक के रूप में शुरू किया था और अपने असली जुनून डिज़ाइनिंग में आने से पहले कई साल चिकित्सा कार्य भी किया. पुरस्कार विजेता डिजाइनर, गणेश ने डोमस एकेडमी, मिलान, इटली से फैशन डिज़ाइनिंग में स्नातकोत्तर किया है तथा राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान से टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग में डिप्लोमा किया है. गणेश की उक्ति है - मैं बिना पीछे देखे आगे जाना चाहता हूँ.

अनुजा गुप्ता, दिल्ली स्थित राही ( रिकवरिंग एंड हीलिंग फ्रॉम इन्सेस्ट ) संस्था की संस्थापक हैं, जो वैसे वयस्कों के मदद के लिए संकल्पित उन पहली संस्थायों में से एक है, जिन्हें बचपन में कौटुम्बिक व्यभिचार का शिकार होना पड़ा. वे पीड़ितों से उनके कटु अनुभवों के बारे में बात करने तथा उनके दर्द और अवसादों से उभरने में मदद करती हैं, इस प्रकार बाल यौन शोषण के चारों और घिरी चुप्पी तोड़ती हैं
नैदानिक मनोविज्ञानी डॉ0 रजत मित्रा "स्वचेतन सोसायटी फॉर मेंटल हेल्थ' के निदेशक हैं, जो जघन्य अपराधों के शिकार व्यक्तियों को साक्ष्य आधारित देखभाल और मनोवैज्ञानिक मदद के लिए संकल्पित गैर लाभकारी संस्था है. वो पिछले २० वर्षों से दिल्ली में जेलों, कानून प्रवर्तन तथा न्यायपालिका के विभिन्न क्षेत्रों में आपराधिक न्याय प्रणाली को समझने तथा बेहतर देखभाल के तरीकों को विकसित करने का कार्य कर रहे हैं.

निशीत कुमार, संकट ग्रस्त बच्चों के लिए भारत की पहली नि:शुल्क हेल्पलाइन चाइल्डलाइन में संचार तथा रणनीतिक कार्यवाही के प्रमुख है, जो बच्चों की आपातकालीन जरूरतों में प्रतिक्रिया देती है तथा उनको लम्बी अवधि के देखभाल तथा पुनर्वास सुविधायों से जोड़ती हैं.
 
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